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उज्जैन: आवारा मवेशी बन रहे लोगों की जान के दुश्मन
उज्जैन।शहर की कोई गली हो या मुख्य मार्ग सभी दूर आवारा मवेशी बड़ी संख्या में घूमते नजर आ जाते हैं, यही मवेशी पैदल सड़क पर निकले वाली महिलाओं और वृद्धों को घायल करते हैं तो वाहन चालकों को भी खतरा बना रहता है, लेकिन नगर निगम द्वारा आवारा मवेशियों को पकडऩे की कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि नगर निगम आयुक्त स्वयं शहर में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने निकलते हैं उन्हें भी सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी नहीं दिखते। सुबह बाइक सवार दंपत्ति आवारा मवेशी से बचने के चक्कर में कुत्ते से टकराकर गंभीर घायल हो गये जिनका जिला चिकित्सालय में उपचार जारी है।
गोर्धनलाल पिता बद्रीलाल 33 वर्ष निवासी मणिपार्क अपनी पत्नी पवित्रा के साथ बाइक पर मजदूरी करने जा रहा था। आगर रोड पर आवारा मवेशी से बचने के चक्कर में उनकी बाइक का संतुलन बिगड़ा उसी दौरान आवारा श्वान बाइक के पहिये में आ गया। दुर्घटना में गोर्धनलाल को गंभीर चोंटे आई जबकि पवित्राबाई भी घायल हो गई, दोनों को राहगिरों ने जिला चिकित्सालय पहुंचाया।
जहां आयुक्त निरीक्षण कर रहे थे, वहीं आवारा मवेशी विचरण करते रहे
सुबह नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल रामघाट क्षेत्र में सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंचे। उन्होंने रामानुजकोट से लेकर नदी क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया। खास बात यह रही कि जिस क्षेत्र में आयुक्त निरीक्षण कर रहे थे उसी क्षेत्र में आवारा मवेशी भी घूम रहे थे जिन पर आयुक्त का ध्यान तक नहीं गया।
इन प्रमुख मार्गों पर मवेशियों का जमावड़ा:
वैसे तो शहर के सभी मार्गों पर आवारा मवेशी नजर आते हैं, लेकिन मुख्य मार्ग जहां यातायात का अत्यधिक दबाव रहता है उन मार्गों से भी नगर निगम की टीम द्वारा मवेशियों को नहीं हटाया जाता जिनमें गोपाल मंदिर, बुधवारिया, ढाबारोड़, मिर्जा नईम बेग मार्ग, सतीगेट, कंठाल, नई सड़क, महाकाल मार्ग प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में सुबह से देर रात तक पैदल चलने वालों के साथ दो पहिया वाहन चालकों का दबाव रहता है और आवारा मवेशियों के बीच सड़क पर विचरण करने के कारण यातायात तो बाधित होता है साथ ही लोगों को भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। शहर में प्रतिदिन करीब ३-४ लोग आवारा मवेशियों के कारण दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, वहीं नगर निगम अधिकारी आवारा मवेशी पकडऩे की मुहिम पर ध्यान नहीं दे रहे।